प्रागैतिहासिक सभ्यताए, ancient history hindi

By | August 20, 2018

Ancient history hindi

प्रागैतिहासिक सभ्यताए : (ancient history in hindi), (bharat ka itihas) प्रागैतिहासिक सभ्यताए की जानकारी आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी, यहां पर आप सभी युग के बारे में जानकारी प्राप्त कर पाएंगे. इसी से हमारे इतिहास की जानकारी प्राप्त होती है,

प्रागैतिहासिक सभ्यताए : Ancient history in hindi

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ancient history in hindi

आज हम प्रागैतिहासिक सभ्यताओं के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं अगर हम इस युग के बारे में जानकारी प्राप्त करना है चाहते हैं तो वह जानकारी हमें पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हो पाती है और जो हमारे पास जानकारी है वह हमें खुदाई से ही प्राप्त जो सामग्रियां मिलती हैं उन्हीं के आधार पर हम इस युग की जानकारी ले सकते हैं अगर हम इस योग के बारे में जानकारी चाहते हैं तो हमारे पास उनके सामान जो की खुदाई में प्राप्त किए गए थे उनकी जांच करने के बाद ही हमें इस युग के बारे में जानकारी प्राप्त हो सकती है

 

इस युग की जानकारी लेने के लिए हमारे पुरातत्व बहुत सारी छानबीन करते हैं और खुदाइयों में मिली हुई वस्तुओं की जांच करते हैं और उनका अध्ययन भी करते हैं जिससे हमें इन सभ्यताओं के बारे में जानकारियां प्राप्त होती हैं खुदाई के दौरान हमें बहुत सारे वस्तुएं प्राप्त होती हैं जिनसे हम यह अंदाजा लगा पाते हैं कि उस समय में उनका जीवन कैसा रहा होगा आरंभ में मनुष्य ने बहुत सारी चीजों को समझा होगा और अपने आसपास की वस्तुओं का प्रयोग करके ही उनसे बहुत सारे सामान बनाए हैं

 

इस तरह के बनाए हुए सामान से वह अपनी दैनिक प्रक्रिया को पूरा कर पाता है जब पहली बार मानव धरती पर आया होगा तो उससे सबसे पहले यही विचार आया होगा कि सबसे पहले मुझे अपनी भूख को समाप्त करना चाहिए अपनी भूख को समाप्त करने के लिए उसने शिकार करना और भोजन को इकट्ठा करना शुरू किया होगा धीरे-धीरे उसने ऐसी वस्तुओं का भी निर्माण कर लिया था जिससे वह शिकार को आसानी से पकड़ सकता था और उन्हें सुरक्षित रख सकता था शिकार को पकड़ने के लिए सबसे पहले मनुष्य ने पत्थर का ही प्रयोग किया था और पत्थर को बहुत अच्छी तरह से विकसित कर लिया था जिससे कि वह शिकार को आसानी से पकड़ सके

 

सबसे पहले हम पुरापाषाण युग (50,000 वर्ष पूर्व)के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं

पुरापाषाण युग के बारे में अगर हम बात करें तो यह हिमकाल का योग होगा यहां पर बर्फ की चादरे जमी हुई थी क्योंकि स्थानों पर बर्फ पड़ती थी इस युग को भारी वर्षा का भी युग कहा जाता है क्योंकि इस समय में भारी वर्षा हुआ करती थी इस योग के बारे में पत्थर से बनी वस्तुओं के आधार पर हम यह जान सकते हैं पुरापाषाण युग में मानव ने कुल्हाड़ी और कंकड़ों से बहुत सारी वस्तुओं का निर्माण कर लिया था क्योंकि कुछ स्थानों से हाथ की बनी कुल्हाड़ियां प्राप्त हुई हैं जिनके आधार पर हम यह कह सकते हैं

 

जब सोहन नदी की घाटी में प्राप्त हथियारों और औजार मिले तभी यह जानकारियां हमें प्राप्त हुई हैं इस युग का मानव भोजन को इकट्ठा करने में पूरी तैयारी कर चुका था और वह औजार भी बना रहा था इनके द्वारा बनाए गए सभी वस्तुओं से वह शिकार मारने और उन्हें पकड़ने में बहुत ही सक्षम था इस युग का मानव हमेशा यही सोचा करता था कि मुझे ऐसी जगह की तलाश करनी चाहिए जहां पर पानी और भोजन मुझे आसानी से प्राप्त हो सके इसलिए वह ऐसी ही जगह की तलाश में रहता था जिससे कि वह आसानी से सब कुछ कर सकता था

 

अब हम आरंभिक पुरापाषाण युग के बारे में जानकारियां देने जा रहे हैं

इस युग में मानव कांचमणि से बहुत सारी वस्तुएं बनाता था कांच मणि सबसे लोकप्रिय वास्तु थी इस युग में हाथ की कुल्हाड़ियों को वह अपनी मुट्ठी में पकड़कर शिकार करता था अगर हम इस क्रिया के बारे में जानकारी देते हैं तो यह बहुत ही खतरनाक साबित होती थी क्योंकि यह शिकार के नजदीक जाकर ही किया जा सकता था इस युग में जो भी वस्तुएं बनाई जाती थी जिनसे वह शिकार करता था वह जानवरों की चमड़ी को भी अच्छी तरह से साफ कर सकता था

 

अब हम मध्य पुरापाषाण युग के बारे में जानकारियां देने जा रहे हैं

इस युग में मानव पत्थरों के टुकड़ों से बनाएं जाने वाली वस्तुओं का प्रयोग करता था इसने कुल्हाड़ी के साथ-साथ खुरचनी का भी प्रयोग कर लिया था इस युग में मानव बहुत सारी वस्तुएं पत्थरों से ही बनाया करता था मध्य पुरापाषाण युग में बहुत सारी वस्तुएं जैसे सोन नदी की घाटी और ऐसे बहुत सारे स्थान हैं जिनसे इनकी जानकारियां प्राप्त होती है

 

अब हम उच्च पुरापाषाण युग (20,000  ई० पू० – 8,000 ई० पू०) के बारे में जानकारियां देने जा रहे हैं

इस युग में मानव ने दो तरह की वस्तुओं का निर्माण किया था और उनका नाम फलक और तक्षिण ही था इसके प्रमाण आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि से मिले हैं उच्च पुरापाषाण युग बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पर सभी वस्तुएं चकमक के बनी थी

 

अब हम मध्य पाषाण युग (8,000 ई० पू० – 4,000 ई० पू० )के बारे में जानकारियां देने जा रहे हैं

 

इस युग में बहुत सारे बदलाव हो रहे थे बदलाव के दौरान मौसम में परिवर्तन हो रहा था और जीव जंतुओं में भी काफी बदलाव देखने को मिले थे इस युग में तीर और कमान देखने को मिले थे इस युग में हड्डी से बने कुछ औजार भी मिले हैं इस युग में मिट्टी के बर्तन भी बनाए हुए देखे जा सकते हैं जो कि अच्छी तरह से पके हुए नहीं थे इस युग में सभ्यता का बहुत ही तेजी से विकास हो रहा था इस युग में मछली पकड़ने के लिए भालों का भी प्रयोग किया गया था

 

अब हम नवपाषाण युग (6,000 ई० पू० – 1000 ई० पू०)के बारे में जानकारी देंगे

इस युग में पत्थर से बनी हुई कुल्हाड़ियां प्राप्त होती हैं और साथ ही हड्डियों से बने कुछ औज़ार भी हमें प्राप्त होते हैं इस युग में बहुत सारी कुल्हाड़ियां देखने को मिलती हैं ऐसा माना जाता है कि लोग हड्डियों के औजार बनाते थे और मिट्टी के बर्तन भी बनाया करते थे जिनका रंग सलेटी होता था ऐसा माना जाता रहा है कि इस युग में उन्हें खेती की कला का भी बहुत ज्यादा हो गया था क्योंकि इस युग में उन्हें धान गेहूं और मूंग के जले हुए दाने प्राप्त हुए थे

 

अगर यह देखा जाए तो यह युग ग्रामीण सभ्यता का पहला चरण माना जा रहा है क्योंकि इसमें धीरे-धीरे भोजन का भी उत्पादन किया जा रहा था साथ में ही शिकार का भी प्रयोग करते थे क्योंकि यहां पर मिट्टी के बर्तन भी प्राप्त हुए हैं

 

अब हम ताम्र पाषाण काल के बारे में जानकारी देंगे

ताम्र पाषाण काल में सबसे पुरानी बस्तियां राजस्थान में पाई गई हैं महाराष्ट्र से बहुत से ऐसे स्थान है जहां पर ताम्र पाषाण काल के कुछ अवशेष भी प्राप्त किए गए हैं उत्तर प्रदेश में भी इलाहाबाद क्षेत्र में ऐसे प्रमाण मिले हैं ताम्र पाषाण काल में मनुष्य छोटे-छोटे औजारों का प्रयोग करता था और इनके फलक पत्थर के बने होते थे ऐसा भी देखा गया है कि कुछ जगह पर वह पत्थर की कुल्हाड़ियों का प्रयोग करता रहता था इस इस युग में ऐसा देखा गया है कि कुम्हार के चाक पर भी बहुत सारे मिट्टी के बर्तन बनाए गए हैं गेरू रंग के मिट्टी के बर्तन से ही इस युग की विशेषता देखने को मिलती है लेकिन बहुत सी ऐसी जगह पर काले और लाल रंग के मिट्टी के बर्तन भी प्राप्त हुए हैं ताम्र पाषाण काल में तांबे के औजार भी बनाए जाते थे ताम्र पाषाण काल के लोग गांव में रहते थे और वह अनाज को उपजाने की भी कला को सीख चुके थे.

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