हड़प्पा सभ्यता की जानकारी, bharat ka itihas

By | August 26, 2018

bharat ka itihas

हड़प्पा सभ्यता की जानकारी, (bharat ka itihas) हड़प्पा सभ्यता की जानकारी से आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है इससे आप जान पायंगे की इस सभ्यता से हमे कौन सी जानकारी प्राप्त हुई है और इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है.

हड़प्पा सभ्यता की जानकारी : bharat ka itihas

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bharat ka itihas

हड़प्पा सभ्यता या हम इसे सिंधु घाटी की सभ्यता भी कह सकते हैं हड़प्पा सभ्यता वासियों ने काफी विकास कर लिया था उन्होंने अपने नगरों को और अपनी लेखन कला में काफी सुधार भी किया था लेकिन अभी भी एक समस्या आती है कि इस लिपि का अर्थ निकालने में समस्याएं पैदा हो रही हैं हम यह भी कह सकते हैं कि इस लिपि का अर्थ अभी तक भी हमें मालूम नहीं चला है

 

हड़प्पा सभ्यता के लोग वास्तुकला और कृषि के बारे में काफी कुछ जानते थे कुछ जानकारियों से प्राप्त यह हुआ है कि इनके व्यापारिक संबंध भी देखने को मिले हैं हम यह कह सकते हैं कि इस सभ्यता के लोग व्यापार भी करते थे हमें खुदाई में यह जानकारियां प्राप्त हुई है कि यह सभ्यता बलूचिस्तान, पंजाब, राजस्थान, गुजरात आदि क्षेत्रों तक फैली हुई थी हड़प्पा सभ्यता के बारे में अगर हम बात करें तो यहां पर पक्की हुई ईटों का ही प्रयोग किया गया है

 

हम यह कह सकते हैं कि मिट्टी की पक्की ईंटों में यह सभ्यता के लोग काफी कुछ जानते थे क्योंकि हड़प्पा वासियों ने कुछ इमारतों में पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया है ऐसा भी माना जाता है कि उन्होंने सभी ईंटों को धूप में सुखाया था हड़प्पा सभ्यता में बहुत ही अच्छी प्रकार की मिट्टी के बर्तन और उनकी मूर्तियां बनाने की कला को अच्छी तरह से जानते थे हड़प्पा सभ्यता अपनी नगर योजना में काफी अच्छे माने जाते हैं ऐसा माना जाता है कि इन्होंने नगर को दो भागों में बांटा था नगर को दो भागों में बांटने की विशेषताएं यह बताई जाती है कि पहले भाग को इन्होंने ऊंचाई के स्तर पर रखा था जहां पर उन्होंने अपनी चारदीवारी का प्रयोग किया था ऐसा माना जाता है कि दूसरे क्षेत्र को उन्होंने नदी के किनारे बसाया था और दूसरे क्षेत्र में साधारण जनता ही निवास करती थी और जो चारदीवारी उन्होंने ऊंचाई पर बनाई थी उसमें शासक के रूप में वह कार्य करते थे

 

अगर हम हड़प्पा सभ्यता के नगरों की ये सड़कों के बारे में बात करते हैं तो यह बहुत ही अच्छी व्यवस्था में स्थिति थी सड़कों के आकार शतरंज की बनी पट्टी की तरह समकोण पर काटती हुई सड़कें नजर आती थी

 

अब हम मोहनजोदड़ो के बारे में जानकारियां प्राप्त करने जा रहे हैं

 

मोहनजोदड़ो के बारे में अगर हम बात करते हैं तो उनमें भट्टी में पकी हुई ईंटों के बारे में जानकारियां प्राप्त होती हैं मोहनजोदड़ो में विशाल स्नानागार भी पाए गए हैं और इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि पानी कहीं से भी रिसाव ना करता हो मोहनजोदड़ो में कमरों के बारे में भी जानकारियां मिलती हैं और वहां पर बनाए गए विशाल कुए को भी देखने को मिलते हैं मोहनजोदड़ो में हमें अनाज को रखने की व्यवस्था के बारे में भी जानकारियां प्राप्त होती है ऐसा माना जाता था कि अनाज को सुरक्षित स्थान पर रखना यहां पर बहुत ही महत्वपूर्ण देखने को मिलता है

 

हड़प्पा के बारे में अगर हम बात करें तो यहां पर पक्की ईंटों से बने हुए गोलाकार चबूतरे मिले हैं जिन पर मजदूर अनाज को अच्छे से साफ करते थे क्योंकि यहां की दीवारों में आज भी अनाज के कुछ टुकड़े मिले हैं हड़प्पा सभ्यता के बारे में अगर हम बात करें तो यहां पर पक्की ईंटों का इस्तेमाल किया गया है सड़कें भी बहुत अच्छी तरह से बनाई गई है और घर की दीवारों मोटी और मजबूत रखी गई है हड़प्पा सभ्यता में इस बारे में भी जानकारी प्राप्त करने में मिली है कि स्नान कक्ष की फर्श पर उन्होंने ढलान की व्यवस्था की थी कि जिससे पानी आराम से बाहर निकाला जा सके हड़प्पा सभ्यता में यह भी जानकारी मिलती है कि बहुत से घरों में कुए भी बनाए गए थे

 

मोहनजोदड़ो की जल निकासी व्यवस्था भी बहुत अच्छी तरह से देखने को मिलती है इन्होंने नालियों का प्रयोग इस तरह से किया था कि घरों में बिल्कुल भी गंदा पानी ना रुके मोहनजोदड़ो ने घर में से पानी का निकास करने के लिए सड़कों की नालियों को जोड़ा हुआ था घर का जल निकास सड़कों की नालियों में होता था और यह नालियां बर्फ की चादर से ढकी हुई नजर आती थी और आगे चलकर नदी में यह मिल जाया करते थे अब हम लोथल यानी के गुजरात में साबरमती नदी के किनारे एक विशाल हौज के बारे में जानकारियां प्राप्त करते हैं

 

ऐसा माना जाता है कि यह बहुत ही बड़ा महत्वपूर्ण केंद्र था जहां पर विदेशी जहाज भी आते थे हड़प्पा सभ्यता के लोग कृषि के बारे में भी जानकारियां जानते थे क्योंकि वह पानी का प्रयोग करके जमीन को उपजाऊ बनाने में भी सक्षम थे क्योंकि वह गेहूं और जौ की बुवाई करते थे खुदाई में प्राप्त जानकारियों से हमें यह बात पता चलती है कि वह भूमि को उपजाऊ बनाने में भी सक्षम थे खुदाई में प्राप्त जानकारियां से हमें यह बात भी पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग सरसों, मटर आदि भी उगाते थे हड़प्पा सभ्यता के लोग अच्छे पैमाने पर पशुपालन भी करते थे वह बकरी, भैंस, भेड़ आदि को पालते थे

 

हड़प्पा सभ्यता के लोग कुत्तों और बिल्लियों का भी पालन करते थे ऐसा माना जाता है कि गधे और ऊंट का प्रयोग वह है अधिक समान होने पर उनका प्रयोग करते थे खुदाई में प्राप्त मुहरों पर पशुओं के चित्र भी मिले हैं ऐसा माना जाता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग आभूषण बनाने में कीमती पत्थरों का प्रयोग करते थे उनमें सोना और चांदी का भी प्रयोग किया जाता था हड़प्पा सभ्यता ऊन की कढ़ाई बुनाई पर भी विशेष ध्यान दिया गया था ऐसा माना जाता है कि चिकिने बर्तन बनाने की कला का ज्ञान भी हड़प्पा सभ्यता वालों को मालूम था.

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